
भोरंज की झरलोग पंचायत में ग्राम सभा की बैठक के दौरान बड़ा फैसला लिया गया है। पंचायत प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि बी.पी.एल.-BPL परिवारों को अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाना अनिवार्य होगा। अगर कोई परिवार अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में पढ़ाता पाया गया, तो उसका नाम बी.पी.एल. सूची से हटा दिया जाएगा। पंचायत ने यह निर्णय गांव की आर्थिक पारदर्शिता और सरकारी सुविधाओं के सही पात्र तक पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया है।
पंचायत प्रतिनिधि बनाएंगे बी.पी.एल. सूची की नई रिपोर्ट
ग्राम सभा की बैठक में यह तय किया गया कि सभी पंचायत प्रतिनिधि अपने-अपने वार्ड में जाकर सर्वे करेंगे और उन परिवारों की सूची तैयार करेंगे, जो बी.पी.एल. सूची में शामिल हैं लेकिन अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में भेजते हैं। यह रिपोर्ट पंचायत प्रधान को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर उचित कार्रवाई होगी। बैठक में बताया गया कि कई बी.पी.एल. परिवार अपने बच्चों को महंगी फीस वाले निजी स्कूलों में पढ़ा रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वे बी.पी.एल. की श्रेणी में आने योग्य नहीं हैं।
संपूर्ण स्वच्छता को लेकर पंचायत की सख्त चेतावनी
बैठक में स्वच्छता को लेकर भी विशेष चर्चा हुई। निर्णय लिया गया कि अब से कोई भी ग्रामीण अगर गंदा पानी सड़कों या रास्तों में फेंकता पाया गया, तो उसके खिलाफ पंचायत द्वारा जुर्माना लगाया जाएगा। संपूर्ण स्वच्छता को गांव के विकास का एक अनिवार्य अंग माना गया है और इसके लिए सभी ग्रामीणों को जागरूक और जिम्मेदार बनने की अपील की गई।
विकास कार्यों की समीक्षा: 14वें वित्त आयोग की राशि से हुए कार्यों पर चर्चा
बैठक की अध्यक्षता कर रहे पंचायत प्रधान नरेश ठाकुर ने बताया कि पंचायत को 14वें वित्त आयोग के अंतर्गत जो राशि प्राप्त हुई थी, उसका उपयोग गांव में कई विकास कार्यों में किया गया है। इन कार्यों में ग्रामीणों ने भी अपनी सहमति दी और पंचायत द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की।
नलों में पानी न आने की समस्या भी उठी
बैठक के दौरान ग्रामीणों ने नलों में पानी न आने की समस्या को भी पंचायत प्रतिनिधियों के सामने रखा। इस पर फैसला लिया गया कि पंचायत इस विषय को जल्द ही सिंचाई विभाग और स्वास्थ्य विभाग के संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाएगी ताकि इस समस्या का शीघ्र समाधान किया जा सके।
प्राइवेट स्कूल में बच्चों को पढ़ाना बी.पी.एल. योग्यता पर सवाल
पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि अगर कोई परिवार बच्चों को Private School में पढ़ाने की क्षमता रखता है, तो वह बी.पी.एल. के मानकों पर खरा नहीं उतरता। इस मुद्दे पर ग्राम सभा में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया और कहा गया कि ऐसे परिवारों को बी.पी.एल. सूची से हटाना जरूरी है ताकि वास्तविक जरूरतमंदों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचे।
पंचायत ने ग्रामीणों से मांगे विकास कार्यों के सुझाव
ग्राम सभा की बैठक के अंत में पंचायत प्रधान नरेश ठाकुर ने सभी ग्रामीणों से अपील की कि वे अधिक से अधिक संख्या में ग्राम सभा में भाग लें और गांव के विकास के लिए सुझाव दें। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की भागीदारी से ही पंचायत मजबूत होती है और विकास की गति तेज होती है।
ग्रामीण विकास के लिए पंचायत का सख्त रुख
पंचायत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी, चाहे वह स्वच्छता के मामले में हो या फिर सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग। बी.पी.एल. सूची को लेकर लिए गए निर्णय ने यह संदेश दे दिया है कि पंचायत अब पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ कार्य करेगी।