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कोर्ट ने लिया ऐतिहासिक फैसला, सिर्फ एक क्लिक में जानें सुप्रीम कोर्ट के जजों की संपत्ति!

सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए सभी जजों की जायदाद की जानकारी सार्वजनिक करने का आदेश दिया है। जानिए कैसे यशवंत वर्मा के घर मिली जली हुई नकदी से उठा पारदर्शिता का तूफान और कैसे अब एक क्लिक में देख सकेंगे जजों की पूरी प्रॉपर्टी डिटेल!

By Saloni uniyal
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कोर्ट ने लिया ऐतिहासिक फैसला, सिर्फ एक क्लिक में जानें सुप्रीम कोर्ट के जजों की संपत्ति!
कोर्ट ने लिया ऐतिहासिक फैसला, सिर्फ एक क्लिक में जानें सुप्रीम कोर्ट के जजों की संपत्ति!

Supreme Court ने जजों की जायदाद (Judges Assets) को लेकर ऐतिहासिक और अभूतपूर्व निर्णय लिया है। 1 अप्रैल 2025 को हुई एक महत्वपूर्ण मीटिंग में सुप्रीम कोर्ट के सभी जजों ने सर्वसम्मति से यह फैसला लिया कि उनकी संपत्तियों की जानकारी अब सार्वजनिक की जाएगी। अब आम नागरिक एक क्लिक में Supreme Court की वेबसाइट पर जाकर सभी जजों की संपत्तियों का ब्योरा देख सकेंगे।

इस फैसले का मुख्य उद्देश्य न्यायपालिका की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को और अधिक मजबूत करना है। यह कदम खासतौर पर दिल्ली हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा के घर भारी मात्रा में जली हुई नकदी मिलने के मामले के बाद उठाया गया है, जिसने पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए थे।

पहले क्या था Judges Assets को लेकर नियम?

अब तक के नियमों के मुताबिक, Supreme Court और High Court के सभी जजों को अपने पदभार ग्रहण करने के बाद Chief Justice को अपनी संपत्ति का ब्योरा देना अनिवार्य होता था। हालांकि, इसे पब्लिक करने की कोई बाध्यता नहीं थी। Supreme Court की वेबसाइट पर जजों की संपत्ति की जानकारी के लिए एक विशेष सेक्शन मौजूद था, लेकिन उसे नियमित रूप से अपडेट नहीं किया जाता था।

अब जो फैसला लिया गया है, उसके तहत यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी जजों की संपत्ति की जानकारी न केवल Chief Justice के पास हो, बल्कि इसे Supreme Court की आधिकारिक वेबसाइट पर नियमित रूप से सार्वजनिक रूप में उपलब्ध कराया जाए।

यशवंत वर्मा केस बना बदलाव की वजह

Supreme Court का यह कदम ऐसे समय में आया है जब न्यायपालिका की पारदर्शिता को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। विशेषकर Delhi High Court के जज यशवंत वर्मा से जुड़े मामले के बाद यह मुद्दा सुर्खियों में आया।

14 मार्च को न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के सरकारी आवास पर आग लगने और वहां भारी मात्रा में जली हुई नकदी मिलने की खबर ने तहलका मचा दिया था। इसके तुरंत बाद केंद्र सरकार ने उन्हें Delhi High Court से Allahabad High Court ट्रांसफर करने का आदेश जारी किया। Supreme Court ने भी स्पष्ट कर दिया कि तबादले के बाद जस्टिस वर्मा को कोई न्यायिक कार्य नहीं सौंपा जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम का सक्रिय रवैया

Supreme Court Collegium, जिसकी अध्यक्षता Chief Justice संजीव खन्ना कर रहे हैं, ने पहले ही जस्टिस वर्मा के ट्रांसफर की सिफारिश की थी। कोलेजियम ने साफ किया कि यह तबादला जस्टिस वर्मा के खिलाफ चल रही आंतरिक जांच से अलग है।

चीफ जस्टिस ने पिछले सप्ताह इस विवाद की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया और दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय को निर्देश दिया कि वे जस्टिस वर्मा को कोई न्यायिक काम न सौंपें। आदेश के तुरंत बाद उनके सभी न्यायिक कार्य वापस ले लिए गए।

पारदर्शिता और विश्वसनीयता की दिशा में Supreme Court का बड़ा कदम

Supreme Court द्वारा Judges Assets को सार्वजनिक करने का फैसला भारतीय न्यायपालिका में पारदर्शिता की दिशा में एक बड़ा और स्वागतयोग्य कदम माना जा रहा है। इससे न केवल आम जनता का भरोसा बढ़ेगा, बल्कि न्यायपालिका की साख और निष्पक्षता भी मजबूत होगी।

इस फैसले के लागू होते ही भारत की सर्वोच्च अदालत दुनिया की उन कुछ न्यायपालिकाओं में शामिल हो जाएगी, जहां न्यायधीशों की संपत्ति की जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होती है।

भविष्य में क्या होगा असर?

इस फैसले से यह संकेत मिलता है कि अब Supreme Court किसी भी प्रकार के विवाद या भ्रष्टाचार के आरोपों को गंभीरता से ले रहा है और पारदर्शिता की नीति को सर्वोपरि मान रहा है। इससे अन्य न्यायिक संस्थाएं भी प्रेरित हो सकती हैं और न्यायिक सुधारों की दिशा में नए मानदंड स्थापित हो सकते हैं।

साथ ही यह भी उम्मीद की जा रही है कि इस पहल से न केवल जनता का भरोसा बढ़ेगा बल्कि यह न्यायिक प्रणाली में जवाबदेही और ईमानदारी को भी बढ़ावा देगा।

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