
1 अप्रैल 2025 से लागू होने वाले नए इनकम टैक्स नियमों के तहत भारतीय टैक्सपेयर्स को अपने इनकम टैक्स के भुगतान को लेकर नई परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा। इस बदलाव के बाद, सरकार ने टैक्स स्लैब्स और डिडक्शन की संरचना में कुछ अहम परिवर्तन किए हैं, जो आपके टैक्स दायित्वों को प्रभावित कर सकते हैं। यदि आप इस बदलाव को सही ढंग से समझते हैं, तो आप अपनी टैक्स बचत को अधिकतम कर सकते हैं।
नई टैक्स रीजीम में मिलेगी राहत
हालांकि सरकार ने टैक्स स्लैब्स में बदलाव किए हैं, लेकिन नई टैक्स रीजीम की आकर्षकता के बावजूद कुछ खास डिडक्शन्स, जैसे कि सेक्शन 80C, सेक्शन 80D और सेक्शन 24B, जो पुरानी टैक्स रीजीम के तहत दी जाती थीं, अब नई रीजीम में उपलब्ध नहीं होंगी। इन डिडक्शन्स का लाभ उन टैक्सपेयर्स को होता था जिन्होंने होम लोन, जीवन बीमा, बच्चों की शिक्षा, हेल्थ इंश्योरेंस, और अन्य बचत योजनाओं में निवेश किया था।
पुरानी टैक्स रीजीम बनी रहेगी फायदेमंद
यह सच है कि नई टैक्स रीजीम में करों के भुगतान में एक अधिक सीधी और सरल प्रक्रिया हो सकती है, लेकिन जो टैक्सपेयर्स होम लोन लेते हैं या जिन्हें HRA (House Rent Allowance) का लाभ मिल रहा है, उनके लिए पुरानी टैक्स रीजीम अधिक फायदेमंद साबित हो सकती है। अगर आपने अपनी कमाई में से कुछ हिस्से को टैक्स डिडक्शन के रूप में बचाया है, तो पुरानी रीजीम के तहत मिलने वाली डिडक्शन्स की मदद से आप अपनी कर दर को कम कर सकते हैं।
कौन सी रीजीम आपके लिए सही होगी?
नई टैक्स रीजीम का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें कोई जटिलता नहीं होती। आपको टैक्स डिडक्शन के लिए अलग से दस्तावेज़ीकरण या विवरण देने की आवश्यकता नहीं होती। इसके अलावा, टैक्स स्लैब्स में भी कुछ राहत दी गई है। हालांकि, यदि आपने किसी निश्चित बचत योजना में निवेश किया है और सेक्शन 80C, 80D या 24B का फायदा उठाने के इच्छुक हैं, तो पुरानी रीजीम आपके लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकती है।