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शादी करने पर मिलते हैं ₹2.5 लाख! जानें कौन-से कपल्स को मिलता है फायदा और क्या हैं शर्तें

सरकार दे रही है Intercaste Marriage करने वाले जोड़ों को मोटी रकम, जानिए इस स्कीम का फायदा उठाने का सही तरीका और किन डॉक्युमेंट्स से होगा आवेदन पास!

By Saloni uniyal
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शादी करने पर मिलते हैं ₹2.5 लाख! जानें कौन-से कपल्स को मिलता है फायदा और क्या हैं शर्तें
शादी करने पर मिलते हैं ₹2.5 लाख! जानें कौन-से कपल्स को मिलता है फायदा और क्या हैं शर्तें

अंतरजातीय विवाह (Intercaste Marriage) को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार एक खास स्कीम चला रही है, जिसके तहत योग्य कपल्स को 2.5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। इस योजना का उद्देश्य समाज में जातिगत भेदभाव को कम करना और सामाजिक एकता को बढ़ावा देना है।

क्या है Dr. Ambedkar Scheme for Intercaste Marriage?

इस योजना का नाम है Dr. Ambedkar Scheme for Social Integration through Inter-Caste Marriages। इसे डॉ. अंबेडकर फाउंडेशन के माध्यम से संचालित किया जाता है। अगर कोई व्यक्ति अनुसूचित जाति (SC) से बाहर का है और वह किसी दलित समुदाय से विवाह करता है, तो ऐसे कपल को केंद्र सरकार की ओर से 2.5 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है।

यह योजना पहली बार वर्ष 2013 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा शुरू की गई थी, लेकिन मौजूदा केंद्र सरकार भी इसे अब तक चला रही है। इस योजना का मूल उद्देश्य Intercaste Marriage को बढ़ावा देना और सामाजिक समरसता स्थापित करना है।

किन कपल्स को मिलता है इस स्कीम का लाभ?

इस योजना के तहत केवल उन्हीं जोड़ों को लाभ मिल सकता है जो कुछ विशेष शर्तों को पूरा करते हैं। इनमें सबसे प्रमुख शर्त यह है कि विवाह करने वाले दोनों लोगों में से एक अनुसूचित जाति (SC) से संबंधित हो और दूसरा व्यक्ति किसी अन्य जाति से हो। यानी यह योजना केवल अंतरजातीय विवाह (Intercaste Marriage) पर ही लागू होती है।

साथ ही, यह भी अनिवार्य है कि शादी हिंदू मैरिज एक्ट 1955 के तहत रजिस्टर हो। अगर विवाह रजिस्टर्ड नहीं है, तो इस योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा।

ये शर्तें हैं बेहद जरूरी

सरकार की इस योजना का लाभ उठाने के लिए कुछ शर्तों का पालन करना अनिवार्य है:

  • कपल में से एक का अनुसूचित जाति (SC) से होना अनिवार्य है, जबकि दूसरा गैर-SC होना चाहिए।
  • शादी केवल पहली बार हुई होनी चाहिए। यदि किसी भी व्यक्ति की यह दूसरी शादी है, तो वह इस योजना के लिए पात्र नहीं है।
  • विवाह हिंदू मैरिज एक्ट 1955 के तहत रजिस्टर्ड होना चाहिए और उसका सर्टिफिकेट आवेदन में लगाना अनिवार्य है।
  • कपल को शादी के एक साल के भीतर इस योजना के लिए आवेदन करना होगा।
  • अगर केंद्र या राज्य सरकार की किसी अन्य योजना से कपल को पहले से कोई वित्तीय सहायता मिली है, तो वह राशि इस स्कीम की 2.5 लाख की राशि से घटा दी जाएगी।

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कैसे मिलती है प्रोत्साहन राशि?

इस योजना के अंतर्गत कुल 2.5 लाख रुपये दिए जाते हैं। इसमें से 1.5 लाख रुपये RTGS/NEFT के माध्यम से कपल के जॉइंट बैंक अकाउंट में सीधे ट्रांसफर किए जाते हैं। बाकी 1 लाख रुपये की राशि डॉ. अंबेडकर फाउंडेशन में 3 वर्षों के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट कर दी जाती है। 3 साल के बाद यह राशि ब्याज सहित कपल को दी जाती है, बशर्ते कि कपल तब तक एकसाथ वैवाहिक जीवन में रह रहा हो।

आवेदन प्रक्रिया क्या है?

यदि आप भी इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं, तो आपको एक सिफारिश पत्र अपने क्षेत्र के सांसद या विधायक से प्राप्त करना होगा। इस सिफारिश पत्र के साथ आवेदन फॉर्म को भरकर डॉ. अंबेडकर फाउंडेशन को भेजना होता है। आप यह आवेदन अपने जिले के जिला प्रशासन या राज्य सरकार के माध्यम से भी भेज सकते हैं।

इस स्कीम से जुड़ी विस्तृत जानकारी और आवेदन फॉर्म http://ambedkarfoundation.nic.in/ वेबसाइट के Schemes सेक्शन में उपलब्ध है।

आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज

  • हिंदू मैरिज एक्ट 1955 के तहत पंजीकृत विवाह का प्रमाणपत्र
  • दलित समुदाय से संबंधित व्यक्ति का जाति प्रमाणपत्र
  • कपल की पहली शादी होने का प्रमाण
  • एक शपथपत्र जिसमें दोनों की कानूनी रूप से शादीशुदा होने की पुष्टि हो
  • कपल का जॉइंट बैंक अकाउंट और आय प्रमाण पत्र

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योजना का उद्देश्य और समाज पर असर

Intercaste Marriage को बढ़ावा देना आज के भारत के सामाजिक ढांचे में बेहद जरूरी बन चुका है। हालांकि पढ़ाई-लिखाई और आधुनिकता के बावजूद आज भी अधिकतर लोग अपनी ही जाति में विवाह करना पसंद करते हैं। यही कारण है कि सरकार ने ऐसी स्कीम लॉन्च की है, जिससे सामाजिक भेदभाव को कम किया जा सके।

इस योजना से न केवल अंतरजातीय विवाह को स्वीकृति मिलती है, बल्कि यह समाज में समानता और एकता की दिशा में भी एक मजबूत कदम है। आर्थिक सहायता के जरिए कपल्स को एक नई शुरुआत करने का अवसर मिलता है, जिससे वे बिना किसी सामाजिक दबाव के स्वतंत्र जीवन जी सकें।

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