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बाइक टैक्सी बैन! हाई कोर्ट के आदेश से रैपिडो समेत सभी तरह की बाइक टैक्सी होंगी बंद

बेंगलुरु हाई कोर्ट ने Rapido समेत सभी बाइक टैक्सी सेवाओं पर लगाई अस्थायी रोक! यात्रियों की जेब पर पड़ेगा असर, स्टार्टअप्स की उड़ सकती है नींद। सरकार को क्यों कहा गया नीति बनाने के लिए? क्या अब शहरों में बढ़ेगा ट्रैफिक और किराया? जानिए इस बड़े फैसले के पीछे की पूरी कहानी।

By Saloni uniyal
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बाइक टैक्सी बैन! हाई कोर्ट के आदेश से रैपिडो समेत सभी तरह की बाइक टैक्सी होंगी बंद
बाइक टैक्सी बैन! हाई कोर्ट के आदेश से रैपिडो समेत सभी तरह की बाइक टैक्सी होंगी बंद

कर्नाटक हाई कोर्ट ने बाइक टैक्सी सेवाओं पर बड़ा फैसला सुनाते हुए Rapido सहित सभी प्रकार की बाइक टैक्सी को अस्थायी रूप से प्रतिबंधित कर दिया है। यह आदेश एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया, जिसमें मांग की गई थी कि ऐसे दोपहिया वाहनों को ट्रांसपोर्ट व्हीकल (Transport Vehicle) के रूप में कानूनी मान्यता दी जाए, ताकि उन्हें सार्वजनिक परिवहन के रूप में प्रयोग में लाया जा सके। याचिकाकर्ताओं की दलील थी कि जब कार टैक्सियां और ऑटो रिक्शा सार्वजनिक परिवहन के रूप में पंजीकृत हो सकते हैं, तो बाइक टैक्सी को इससे बाहर क्यों रखा जाए।

हालांकि, अदालत ने फिलहाल इस मांग को स्वीकार नहीं किया और राज्य सरकार को निर्देश दिया कि बाइक टैक्सी सेवाओं को लेकर स्पष्ट और विस्तृत नीति बनाई जाए। इस निर्णय के चलते रैपिडो जैसे प्लेटफॉर्म्स को बड़ा झटका लगा है, जो शहरी ट्रैफिक से निपटने के लिए बाइक टैक्सी को एक किफायती विकल्प के तौर पर पेश कर रहे थे।

हाई कोर्ट का तर्क और सरकारी रुख

बेंगलुरु में हुई सुनवाई में अदालत ने यह स्पष्ट किया कि मौजूदा कानूनों के तहत दोपहिया निजी वाहनों को कमर्शियल उपयोग के लिए परिवर्तित करना कानूनन गलत है। कोर्ट ने कहा कि बिना परिवहन लाइसेंस और बीमा के इन वाहनों का उपयोग सवारी ढोने के लिए किया जाना मोटर व्हीकल एक्ट (Motor Vehicle Act) का उल्लंघन है।

राज्य सरकार ने भी अदालत को बताया कि फिलहाल कर्नाटक में बाइक टैक्सी सेवाओं को लेकर कोई स्पष्ट नीति नहीं है, और जब तक ऐसी कोई नीति नहीं बनाई जाती, तब तक इन सेवाओं को अवैध (Illegal) माना जाएगा। यह भी कहा गया कि ऐसे वाहनों से जुड़े सुरक्षा मानकों पर अभी पर्याप्त शोध और नियमों की जरूरत है।

याचिकाकर्ताओं की मांग और कानूनी दलीलें

याचिका दायर करने वाले नागरिकों और संगठनों ने अपनी याचिका में मांग की थी कि राज्य सरकार ऐसे दोपहिया वाहनों को ट्रांसपोर्ट व्हीकल के रूप में पंजीकृत करने की अनुमति दे। उनका तर्क था कि इससे न केवल रोज़गार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि शहरी इलाकों में ट्रैफिक और प्रदूषण की समस्या को भी कम किया जा सकेगा।

उन्होंने यह भी दलील दी कि कई अन्य राज्य जैसे महाराष्ट्र और दिल्ली में पहले से ही बाइक टैक्सी को वैध रूप से संचालित किया जा रहा है, तो कर्नाटक में इसे अवैध कैसे ठहराया जा सकता है? लेकिन अदालत ने इन तर्कों को अस्वीकार करते हुए कहा कि जब तक राज्य की नीति स्पष्ट नहीं होती, तब तक कोई राहत नहीं दी जा सकती।

यात्रियों और स्टार्टअप्स पर असर

इस फैसले का सीधा असर उन यात्रियों पर पड़ेगा जो ट्रैफिक से बचने के लिए बाइक टैक्सी सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं। रैपिडो और इसी तरह के कई स्टार्टअप्स जो Urban Mobility को आसान बनाने की दिशा में काम कर रहे थे, अब अपने ऑपरेशंस पर पुनर्विचार करने को मजबूर होंगे।

स्टार्टअप इकोसिस्टम के जानकारों का कहना है कि इस फैसले से इनोवेशन पर ब्रेक लगेगा और निवेशकों का विश्वास डगमगा सकता है। हालांकि यह भी माना जा रहा है कि यदि सरकार जल्द कोई पॉलिसी लेकर आती है, तो यह अस्थायी झटका दीर्घकालिक लाभ में बदल सकता है।

भविष्य की राह क्या है?

अब सबकी निगाहें कर्नाटक सरकार पर हैं, जो आने वाले हफ्तों में बाइक टैक्सी को लेकर कोई नियामक ढांचा (Regulatory Framework) पेश कर सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को एक संतुलित नीति लानी चाहिए, जो एक ओर जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करे और दूसरी ओर नए स्टार्टअप्स को बढ़ावा दे।

भारत जैसे देश में जहां पब्लिक ट्रांसपोर्ट व्यवस्था कई शहरों में अभी भी पर्याप्त नहीं है, बाइक टैक्सी जैसे विकल्पों को नजरअंदाज करना दूरदर्शिता नहीं मानी जा सकती। जरूरत है एक ऐसी नीति की जो Innovation और Compliance दोनों के बीच संतुलन बिठा सके।

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