
देश में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) और कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) का इस्तेमाल करने वालों को आने वाले दिनों में ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है। केंद्र सरकार ने एपीएम (Administered Pricing Mechanism) के अंतर्गत आने वाली Natural Gas की कीमतों में इजाफा कर दिया है। 1 अप्रैल 2025 से यह नई कीमतें लागू हो गई हैं। इसके तहत एपीएम गैस की कीमत 6.50 डॉलर प्रति यूनिट (MMBTU) से बढ़ाकर 6.75 डॉलर प्रति यूनिट कर दी गई है।
सरकार का यह फैसला सीधे तौर पर CNG और PNG की कीमतों को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि इन दोनों ईंधनों के लिए एपीएम गैस प्रमुख कच्चा माल है। इसके अलावा बिजली और खाद (Fertilizer) के उत्पादन में भी इस गैस का उपयोग होता है।
एपीएम गैस की कीमतों में बढ़ोतरी का कारण क्या है
पेट्रोलियम मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले Petroleum Planning and Analysis Cell (PPAC) की ओर से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, यह बढ़ोतरी सरकार की तय की गई मूल्य निर्धारण नीति के अनुरूप है। अप्रैल 2023 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने घरेलू स्तर पर उत्पादित Natural Gas की कीमत को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत के औसत 10 प्रतिशत के आधार पर तय करने की सिफारिश को मंजूरी दी थी।
सरकार ने उस समय न्यूनतम कीमत 4 डॉलर प्रति MMBTU और अधिकतम सीमा 6.5 डॉलर प्रति MMBTU तय की थी। अब इसी दायरे को बढ़ाकर अधिकतम सीमा 6.75 डॉलर प्रति यूनिट कर दी गई है।
कीमतों में इजाफा क्यों हुआ और इसका असर कितना होगा
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह बदलाव पहले से तय की गई नीति के अनुसार है, जिसमें हर साल 0.25 डॉलर प्रति यूनिट की वृद्धि का प्रावधान किया गया था। यह बदलाव अप्रैल 2025 से मार्च 2026 तक प्रभावी रहेगा और अगले साल अप्रैल 2026 में इसमें फिर 0.25 डॉलर प्रति यूनिट की और बढ़ोतरी की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि चूंकि एपीएम गैस का इस्तेमाल CNG और PNG के उत्पादन में होता है, ऐसे में इन गैसों की खुदरा कीमतों में भी बढ़ोतरी तय मानी जा रही है।
दो साल बाद हुई कीमतों में पहली बढ़ोतरी
यह एपीएम गैस की कीमतों में पिछले दो वर्षों में पहली बार की गई बढ़ोतरी है। पहले यह कीमतें छमाही आधार पर तय होती थीं, लेकिन अप्रैल 2023 के बाद से इन्हें मासिक आधार पर संशोधित किया जाता है। हालांकि, ये संशोधन अधिकतम और न्यूनतम सीमा के अंतर्गत ही होते हैं।
इसके पहले एपीएम गैस की कीमतें चार अंतरराष्ट्रीय गैस हब्स की औसत कीमतों के आधार पर तय होती थीं। अब यह प्रणाली समाप्त कर दी गई है और Oil Indexation पर आधारित नई व्यवस्था लागू है।
एपीएम गैस की घरेलू उत्पादन में हिस्सेदारी
देश में घरेलू स्तर पर उत्पादित Natural Gas में APM गैस की हिस्सेदारी 70 प्रतिशत है। इसका सबसे ज्यादा उपयोग शहरों में City Gas Distribution (CGD) के लिए होता है, जो कि CNG और PNG उपभोक्ताओं तक गैस पहुंचाता है।
इस CGD क्षेत्र में एपीएम गैस की सप्लाई बिक्री मात्रा का लगभग 60 प्रतिशत होती है। इसलिए इस कीमत में किसी भी प्रकार की वृद्धि सीधा असर आम आदमी की जेब पर डाल सकती है।
कीमतों में और इजाफे की संभावना
PPAC के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमत के 10 प्रतिशत इंडेक्सेशन के आधार पर 1 अप्रैल 2025 से APM गैस की कीमत 7.26 डॉलर प्रति यूनिट होनी चाहिए थी, लेकिन सरकार की तय की गई अधिकतम सीमा के तहत इसे 6.75 डॉलर प्रति यूनिट तक ही बढ़ाया गया है।
इसका सीधा मतलब यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में अगर और बढ़ोतरी होती है, तो आने वाले वर्षों में CNG और PNG की कीमतें और ज्यादा बढ़ सकती हैं।
इस फैसले का आम जनता पर असर
इस फैसले से आम जनता पर महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। विशेषकर वे लोग जो वाहन चलाने के लिए CNG का इस्तेमाल करते हैं या घर में PNG के जरिए खाना बनाते हैं, उन्हें महीने के बजट में बदलाव करना पड़ सकता है।
इसके अलावा, यह फैसला Fertilizer और Power Sector की लागत को भी बढ़ा सकता है, जिसका असर आगे चलकर अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है।